जौनपुर !


भारतीय नव वर्ष अर्थात नव संवत्सर की कोई तारीख निश्चित नहीं होती है , क्योंकि यह भारतीय संस्कृति के अनुरूप नक्षत्रों तथा कालगणना पर आधारित होती है इसका निर्धारण हिंदू पंचांग गणना प्रणाली से होता है । अपने भारत देश में अनेकता में एकता की परंपरा को सहेज रहा है राष्ट्रीय स्वाभिमान और सांस्कृतिक धरोहर को बचाने वाला पुण्य दिवस हिन्दु नव वर्ष चैत्र मास की प्रतिपदा के दिन मनाया जाता है इस दिन से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है महाराष्ट्र में इसी दिन को गुड़ी पड़वा कहा जाता है और दक्षिण भारत में इसे उगादि कहा जाता है विक्रम संवत को नव संवत्सर भी कहा जाता हैं ।संवत्सर पांच प्रकार के होते है जिसमे सौर ,चंद्र ,नक्षत्र ,सावन ,और अधिमास आते हैं ।चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नव वर्ष प्रारंभ होता हैं इस दिन सूर्योदय के साथ सृष्टि का प्रारंभ परमात्मा ने किया था अर्थात इस दिन सृष्टि प्रारंभ हुई थी तभी से यह गणना चली आ रही हैं इसी दिन परमात्मा ने अग्नि वायु आदित्य अंगिरा चार ऋषियों को समस्त ज्ञान-विज्ञान का मूल रूप से संदेश क्रमशः ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद के रूप में दिया था इस नववर्ष को वेद संवत ही कहते हैं ।
आज के दिन ही मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम ने लंका पर विजय प्राप्त कर वैदिक धर्म की ध्वजा फहराई थी । आइए हम सभी लोग मिलकर नव संवत्सर भारतीय संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का और अधिक विस्तार रूप से सभी धर्मों के लोगों को जोड़ने का प्रयास करें । कहा जाता है कि सभी धर्मों में श्रेष्ठ धर्म हिंदू धर्म को माना गया है ।
सच कहा जाए तो विक्रम संवत किसी धर्म विशेष से संबंधित ना होकर संपूर्ण धारा की प्रकृति ,खगोल सिद्धांतो और ग्रह नक्षत्रों से जुड़ा हैं ।इसका उल्लेख हमारे धर्म ग्रंथों में भी है । इसके कई वैज्ञानिक आधार और पूरे विश्व के मानने हेतु तर्क भी है

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