जौनपुर , मछलीशहर


दूसरों के प्रति निस्वार्थ सेवा करना जीवन में कामयाबी का मूल मंत्र है ।
समाजवादी पार्टी से अधिकृत विधान सभा मछलीशहर की विधायक डॉक्टर रागिनी सोनकर ने कहा कि निस्वार्थ भाव से की गई सेवा से किसी का भी ह्रदय परिवर्तन किया जा सकता है हमें अपने आचरण में सदैव सेवा का निहित भाव रखना चाहिए जिससे अन्य लोग भी उत्प्रेरित होकर कामयाबी के मार्ग पर अग्रसर हो सकें ।सेवारत व्यक्ति सर्वप्रथम अपने फिर अपने सहकर्मियों व सेवायोजको के प्रति ईमानदार हो इन स्तरों पर सेवा भाव में आई कमी मनुष्य को धीरे धीरे पतन की और ले जाती हैं ।सेवा भाव ही मनुष्य की पहचान बनाती हैं,और उसकी मेहनत चमकाती हैं ।
समाज की सेवा करना हमारे लिए आत्म संतोष का वाहक ही नहीं बनता बल्कि संपर्क में आने वाले लोगों के बीच भी अच्छाई के संदेश को स्वतः उजागर करते हुए समाज को नई दिशा व दशा देने का काम करते हैं जैसे ,
गुलाब को उपदेश देने की जरूरत नहीं होती है, वह तो अपने केवल खुशबू बिखेरता है उसकी खुशबू ही उसका संदेश है ठीक उसी प्रकार खूबसूरत लोग हमेशा दयावान नहीं होते हैं , बल्कि दयावान लोग हमेशा खूबसूरत होते हैं यह सर्वविदित है सामाजिक आर्थिक सभी रूपों में सेवा भाव अपनी अलग-अलग महत्ता है । बिना सेवा किए किसी भी पुनीत कार्य को अंजाम तक नहीं पहुंचाया जा सकता है सेवा का भाव रखने से समाज में व्याप्त कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने के साथ ही आम जनता को उनके दायित्वों के प्रति जागरूक किया जा सकता है
सचमुच में सेवा भाव सद्भाव का वाहक बनता हैं जब हम एक दूसरे के प्रति सेवा भाव रखते हैं तब आपसी द्वेष की भावना स्वतः ही समाप्त हो जाती हैं और हम सब मिलकर कामयाबी के पथ पर अग्रसर होते हैं ।
हमारा जहां तक मानना है कि सेवा से बड़ा कोई परोपकार इस विश्व में नहीं हैं जिसे मानव सहजता से अपने जीवन में अंगीकार कर सकता हैं ।
यदि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्य को ठीक समय पर पहचान करके उसका निर्वहन करता है तभी एक सभ्य समाज का निर्माण होता है । कभी-कभी हम कर्तव्यों के मामले में भ्रम की स्थिति में हो जाते हैं । ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार महाभारत की युद्ध में अर्जुन भ्रम की स्थिति में थे जब भगवान श्री कृष्ण ने गीता का ज्ञान देकर अर्जुन की आशंकाओं को दूर किया और उन्हें सही मार्ग दिखाएं ऐसी स्थितियां सामान्य मनुष्य के जीवन में भी आना स्वभाविक है
कर्तव्य पालन ही एक ऐसी वस्तु है जिसके द्वारा हम अवर्णनीय आनंद को प्राप्त कर सकते हैं मानव मातृभूमि की रक्षा हेतु हर्षित मन से फांसी के तख्ते पर लटक जाता है उसकी अमर गाथा पुष्प पराग के समान सर्वत्र फैल जाती हैं अतः प्रत्येक मानव को कर्तव्यों का पालन अवश्य करना चाहिए । मनुष्य को अधिकार प्राप्त करने के लिए कर्तव्य का पालन करना चाहिए अधिकार खोकर बैठे रहना मनुष्य के लिए पाप है ।
“अधिकार खोकर बैठे रहना,
यह महा दुष्कर्म है
न्यायार्थ अपने बंधु को भी ,
दण्ड देना धर्म हैं ” ।
आइए हम सभी भारतवासी मिलकर अपने अधिकार के प्रति जागरूक बने एवं अपने दायित्व को निभाए ।

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »