पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया आज सिर्फ नारा बन कर रह गया..!!

शिक्षित लोगों का अधिक संख्या में बेरोजगार होना एक बहुत बड़ी समस्या..!

प्रगति की राह पर चल रहे देश में दिन ब दिन मनुष्य की सुविधाओं के साथ साथ समस्याओं का भी विकास हो रहा है! यह सच है कि कोई भी व्यक्ति संपूर्ण सुख प्राप्त नहीं कर सकता पर जिन अच्छे दिनों की उम्मीदें लोगों ने की थी आज व उदासीनता के तले दबी नजर आ रही हैं! देश में अन्य समस्याओं के साथ साथ बेरोजगारी भी विकराल रूप लेती जा रही है!
हमारे देश में बेरोजगारों की संख्या लाखों नही अब करोड़ो से भी ज्यादा है उनमें से आधे से ज्यादा तो तो व हैं जो उच्च शिक्षा प्राप्त किये हुए हैं!देश में सिर्फ बेरोजगारी चिंता का विषय नहीं है बल्कि शिक्षित लोगों का अधिक संख्या में बेरोजगार होना एक बहुत बड़ी समस्या है!इसका अगर जल्द से जल्द हल नहीं निकाला गया तो इसका सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था पर ही नहींबल्कि लोगों के सामान्य जीवन पर भी बहुत प्रभाव पड़ेगा!आज के समय में इसका स्पष्ट स्वरूप देखा भी जा रहा है!आज युवा अधिक पैसे कमाने के लालच में अनैतिक कार्यों की तरफ बढ़ रहे हैं जिससे सिर्फ उसके जीवन पर नहीं समाज के नैतिक मूल्यों पर भी बुरा असर पड़ रहा है! ऐसे में अगर शिक्षित युवाओं तथा बेरोजगार लोगों को रोजगार दिया जाए तो आज समाज जिस अपराध की खाई में गिर रहा है उसे रोका जा सकता है! बड़ी संख्या में लोग अपना घर बार छोड़ कर रोजगार की तलाश में बड़े बड़े शहरो में आते हैं और आज हर माता पिता अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने में कोई कमी नहीं छोड़ते हैं इस उम्मीद से कि कल यही बच्चे बड़े होकर समाज के विकास में सहयोग करेंगे पर उनके हाथ सिर्फ निराशा आती है पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया आज सिर्फ नारा बन कर रह गया है! क्योंकि आज समाज में बेरोजगारी का स्तर बहुत चिंताजनक है! कोरोना काल के बाद इसने और विकराल रूप धारण कर लिया है !आज देश की एक बड़ी संख्या बेरोजगार है!ऐसे में सवाल यह है कि आखिर यह सब कब तक चलेगा? कब तक युवाओं के सपने बेरोजगारी की मार सहते रहेंगे? आखिर देश का युवा पढ़ तो रहा है पर वह बढ़ेगा कब..?

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